कोविड वाली राखी : भारत देश एक त्योहारों का देश है। जनवरी से लेकर दिसम्बर तक त्योहारों की बौछारें हमें पूरे साल भिगोती रहतीं हैं। अगर साल से त्यौहार निकाल दिए जाएं तो happiness index में हम कम से कम 20 steps नीचें गिर जायेंगें। नफरतों के अंधेरों के बीच ये त्यौहार ही हैं जो प्यार की ज्योति जलाए हुए हैं। ऐसे में जब कोविड -19 ने दुनिया को चपेट में ले रखा है तो हमारे त्यौहारों का भी इसके काले साये से बचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। इस साल की मीठी ईद तो पहले ही फ़ीकी पड़ चुकी है अब कोविड के अगले निशाने पर राखी का त्यौहार है। जब दो गज़ की दूरी हो तो बहन का भाई के हाथ पर राखी बांधने उसके माथे पर तिलक लगाने और उस अपने हाथ मिठाई खिलाने के सुखद अहसास वाली तमन्ना न जाने कैसे पूरी हो ? जहां राखी का असली महत्व अपनों को क़रीब लाना है वही कोविड का उद्देश्य दूरियां बढ़ाना है। पर ये ज़िम्मेदारी हम सब की है कि इन दूरियों क...